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अपने शासन में कांग्रेस ने बना दिया था भारत को आयात से अन्य देशों पर निर्भर!

इतिहास में दिन सोमवार और 25 अगस्‍त 2025 की तारीख अब इस बात के लिए दर्ज हो गई है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने गुजरात प्रवास के दौरान इस बात को प्रमुखता से रखा कि कांग्रेस ने 60 से 65 साल तक भारत पर शासन करते हुए आयात घोटाले करने के लिए देश को दूसरे देशों पर निर्भर बना दिया था। अब इस बात को लोग भले ही सीधे-सीधे स्‍वीकार करने से बचें, लेकिन जो तथ्‍य निकलकर सामने आ रहे हैं, वह तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि स्‍वाधीनता के बाद भी भारत वर्षों तक ‘आत्‍मनिर्भरता’ के मामले में बहुत पिछड़ा रहा। हर बड़ी से छोटी और छोटी से छोटी चीजों पर विदेशी निर्भरता कई वर्षों तक देखने को मिली है, लेकिन वर्तमान काल एक ऐसे ‘आत्‍मनिर्भर’ भारत की गाथा कह रहा है, जो अपने निर्णय स्‍वयं लेता है और किसी से डरता नहीं, जो समयानुसार सीधा प्रहार कर जवाब देता है।

वस्‍तुत: अपने अहमदाबाद के कार्यक्रम में कई परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का कहना रहा है कि किसानों, पशुपालकों और लघु उद्योगों के हित सर्वोपरि हैं और “हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम इसे सहन करेंगे।” यह टिप्पणी अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि में आई है। देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह बयान केवल राजनीतिक कटाक्ष नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आर्थिक संदर्भ मौजूद है। कांग्रेस के कार्यकाल में आयात-निर्भरता बड़े स्‍तर पर दिखाई देती थी। वहीं मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में निर्यात को बढ़ावा देकर और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करके एक नई तस्वीर गढ़ी है।

आंकड़ों की ओर देखें तो 1991 के उदारीकरण के पहले का भारत सभी के सामने है, जिसमें हर छोटी जरूरत के लिए विदेशों पर नि‍र्भर होते हुए भारत को देखा जा सकता है। उसके बाद से लेकर 2014 तक भारत का निर्यात सुधरा, पर यह भी सच है कि वर्ष 2013-14 में मर्चेंडाइज निर्यात 314 अरब डॉलर तक पहुंच गया और सेवाओं के क्षेत्र ने भारत को मजबूती दी। लेकिन इसी अवधि में आयात 463 अरब डॉलर तक जा पहुंचा, जिससे भारत का व्यापार घाटा 145 अरब डॉलर तक रहा। यानी कांग्रेस शासन में आयात-आधारित नीतियों ने देश को संवेदनशील स्थिति में बनाए रखा। चाहे कच्चा तेल हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या रक्षा उपकरण, भारत को विदेशों से ही खरीदना पड़ा। यही कारण रहा कि घोटालों की चर्चाएँ भी इस दौर में सबसे ज्यादा हुईं।

मोदी काल : आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे के साथ घरेलू उत्पादन पर ज़ोर दिया। इसका असर दिखने लगा। 2023-24 में भारत का कुल निर्यात 778 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें 437 अरब डॉलर मर्चेंडाइज और 341 अरब डॉलर सेवाओं का योगदान था। यही नहीं, फार्मा और मोबाइल उद्योग जैसे सेक्टरों ने आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया। मोबाइल फोन निर्यात की कहानी चौंकाने वाली है। 2014-15 में जहाँ यह केवल 0.2 अरब डॉलर था, वहीं 2023-24 में 15.6 अरब डॉलर तक जा पहुंचा। फार्मा निर्यात भी 2013-14 के 15 अरब डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 27.8 अरब डॉलर हो गया।

व्यापार घाटे पर नियंत्रण

मोदी सरकार ने आयात-निर्यात के असंतुलन को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। फरवरी 2025 में भारत का मर्चेंडाइज व्यापार घाटा घटकर 14.05 अरब डॉलर रह गया, जो तीन साल में सबसे कम था। वहीं सेवाओं के निर्यात ने बड़ा सहारा दिया। 2024-25 में सेवाओं का निर्यात 387 अरब डॉलर और आयात केवल 198 अरब डॉलर रहा, जिससे लगभग 189 अरब डॉलर का सेवा-संतुलन भारत के पक्ष में आया। हालांकि यह भी एक तथ्‍य है कि मर्चेंडाइज में घाटा अभी भी बड़ा है, 2024-25 में 282 अरब डॉलर, लेकिन कुल मिलाकर भारत का व्यापार घाटा 94 अरब डॉलर तक सिमट गया।

चीन पर निर्भरता: चुनौती बनी हुई

भारत की सबसे बड़ी चुनौती चीन पर निर्भरता है। 2015-16 में भारत-चीन व्यापार 71 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर 128 अरब डॉलर तक पहुँच गया। इसमें से अधिकांश हिस्सा आयात का है। हालांकि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन में घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देकर इस निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश की है। इसके साथ ही वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। 2005 में जहां भारत का योगदान कुल वैश्विक व्यापार का 1.2 प्रतिशत था, वहीं 2023 में यह बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गया। खासकर सेवाओं के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 4.3 प्रतिशत तक वृद्धि‍ करते हुए दिखाई देती है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, जून 2025 के लिए भारत के वस्तु व्यापार के आंकड़े आयात में गिरावट और निर्यात में स्थिरता देखते हैं । वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला है कि व्यापारिक निर्यात 35.14 बिलियन डॉलर रहा, जो जून 2024 की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47.1% बढ़कर 2.8 बिलियन डॉलर हो गया। आयात के मामले में, आंकड़े स्पष्ट रूप से गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। वस्तुओं का आयात साल-दर-साल 3.7% घटकर 53.9 अरब डॉलर रह गया। सोना, कच्चे तेल और पेट्रोलियम, कोयला और कोक का आयात लगातार घटा है जो बेहतर घरेलू उपलब्धता को दर्शाता है। अमेरिका को निर्यात 23.5% बढ़कर 8.3 अरब डॉलर हो गया, जिससे भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार के रूप में इसकी स्थिति और मज़बूत हुई। इसके विपरीत, चीन को निर्यात 1.4 अरब डॉलर पर मामूली रहा, हालाँकि इसमें साल-दर-साल 17.2% की वृद्धि दर्ज की गई।

इस आधार पर आंकड़े साफ बताते हैं कि कांग्रेस के समय भारत का निर्यात कम और आयात पर निर्भरता बनी रही। मोदी सरकार ने निर्यात को ऊंचाइयों तक पहुँचाया । इसी समय में सेवाओं व मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता दिखाई दी है । सरकार ने संसद में बताया भी कि सुरक्षा जैसे अहम मामले में भी पहले हमें नए रक्षा उपकरणों के लिए बहुत लंबी प्रक्रियाओं के बाद विदेशी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ता था। कभी अंतिम निर्णय लेने तक वे उपकरण पुरानी टेक्नोलॉजी वाले हो जाते थे। यहां तक कि स्पेयर पार्ट्स के लिए भी हम अन्य देशों पर निर्भर थे। पर आज इस दिशा में “आत्मनिर्भर भारत” अभियान शुरू है, जिसका मकसद विदेशी निर्भरता, विशेषकर तकनीकी और रक्षा उपकरणों में उसको घटाना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसी तरह से अन्‍य क्षेत्रों में देखा जा सकता है।