Rajasthan

आबकारी आयुक्त और वित्त सचिव आकर बताए इंटरनेशनल प्लेयर को क्यों नहीं दी नियुक्ति

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा की गत सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से मामले में सकारात्मक निर्णय लेकर 2 सप्ताह में अदालत में जानकारी पेश करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से तय अवधि में कोई जानकारी नहीं दी गई।

याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया की याचिकाकर्ता 26 वर्षीय अंतर्राष्ट्रीय पैरा एथलीट है और 41 फीसदी लोकोमोटर दिव्यांग है। याचिका में कहा गया कि उसने एशियन पैरा गेम्स, 2023 और पेरिस पैरालंपिक, 2024 में प्रतिनिधित्व करते हुए कई विश्व पैरा शूटिंग प्रतियोगिताओं में करीब 20 मैडल जीते हैं। इनमें वर्ल्ड चैम्पियनशिप गोल्ड मैडल भी शामिल है। राज्य के खेल विभाग ने 29 सितंबर, 2023 को आउट ऑफ टर्न अपॉइंटमेंट रूल्स, 2017 के तहत उसका ए श्रेणी में चयन करते हुए उसे सहायक आबकारी अधिकारी की साल 2023-24 की रिक्तियों के विरुद्ध नियुक्ति देने की सिफारिश की। इसमें कहा गया कि यदि पद रिक्त नहीं हैं तो पद का सृजन मान लिया जाए। इस पत्र को 11 अक्टूबर, 2023 को आबकारी विभाग को भेजा गया, लेकिन विभाग ने दिव्यागों के लिए पदों की पहचान नहीं होने का हवाला देते हुए अब तक उसे नियुक्ति नहीं दी। याचिका में बताया गया की राज्य दिव्यांग आयोग में आबकारी विभाग ने स्वीकार किया है कि बीते तीन सालों से दिव्यागों के लिए कोई भी पद पहचान प्रक्रिया नहीं की गई है, यह भी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 33 और धारा 34 के साथ ही इस संबंध में साल 2018 में बनाए नियमों के खिलाफ है। याचिका के अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता के समान मामले में पूर्व में अन्य पैरा एथलीट अवनी लखेरा,सुंदर गुर्जर और देवेंद्र झाझडिया को एसीएफ के पद पर नियुक्ति दी गई थी, जबकि उस समय भी वह पद दिव्यागों के लिए निर्धारित नहीं था। याचिकाकर्ता ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है, लेकिन अफसरों की उपेक्षा के कारण उसे आजीविका और सम्मान से वंचित किया जा रहा है। जिस सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों अधिकारियों को हाजिर होकर जवाब देने को कहा है।