आत्मनिर्भरता की ओर कदम: श्यालावास जेल के कैदियों ने तैयार किए ऊनी कंबल, पहली खेप उदयपुर रवाना
इस उत्पादन इकाई में 5 रेपियर लूम, वारपिंग, मिलिंग, रेज़िंग, बेलिंग, एम्ब्रॉयडरी, सिलाई और वाइंडर जैसी आधुनिक वस्त्र मशीनरी स्थापित की गई हैं। जेल अधीक्षक पारस जांगिड के अनुसार वर्तमान में प्रतिदिन 10 बंदी जेल उद्योगशाला में 8 घंटे कार्यरत हैं और उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य में इस योजना के तहत 25-30 बंदियों को रोज़गार प्रदान करने की योजना है।
शनिवार को इस श्रम और कौशल का पहला परिणाम देखने को मिला। जेल उद्योगशाला में तैयार किए गए 356 कंबलों का प्रथम लॉट औपचारिक रूप से केन्द्रीय कारागार उदयपुर के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक जांगिड, शिवांगन स्पिनर के निदेशक भाटी एवं जेलर सतेंद्र उपस्थित रहे।
कंबल की गुणवत्ता के विषय में बताते हुए शिवांगन स्पिनर के निदेशक भाटी ने पुष्टि की कि यह उत्पाद भारतीय मानक के अनुरूप है। प्रत्येक कंबल में 80% ऊन का इस्तेमाल किया गया है, जिसका वजन 2.450 किलोग्राम और आकार 230 सेंटीमीटर × 152 सेंटीमीटर है। प्रत्येक कंबल की कीमत ₹843 प्रति नग निर्धारित की गई है।
जेल अधीक्षक जांगिड ने बताया कि राज्य के विभिन्न कारागृहों में नियमित आपूर्ति के साथ-साथ पुलिस विभाग से भी एक बड़ा ऑर्डर मिला है। पुलिस विभाग के लिए 2000 कंबलों का ऑर्डर भी प्रक्रिया में है, जिसकी आपूर्ति जल्द ही की जाएगी। यह उत्पादन इकाई न केवल कैदियों के पुनर्वास में मदद कर रही है बल्कि राज्य की आपूर्ति श्रृंखला में भी एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

