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नेपाल के बनेपा में चण्डेश्वरी जात्रा उत्सव की धूम

काठमांडू, 02 मई । नेपाल के काभ्रे जिला के बनेपा में इन दिनों प्रसिद्ध चण्डेश्वरी जात्रा (चण्डेश्वरी यात्रा) धूमधाम से मनाई जा रही है। स्थानीय निवासी हर वर्ष इस पारंपरिक जात्रा का आयोजन करते हैं। बनेपा के सात गांवों में प्रत्येक वर्ष चण्डी पूर्णिमा से लगातार तीन दिनों तक यह उत्सव मनाया जाता है।

जात्रा के पहले दिन सुबह ‘मत पूजा’ अर्थात चिराग यात्रा निकाली जाती है। धिमे, नाय्खिं, छुस्याल सहित विभिन्न पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोग अपने घरों से चिराग लेकर बनेपा के लायकू में एकत्रित होते हैं और वहां से जलेश्वर महादेव तक पहुंचकर चिराग का विसर्जन करते हैं। सुबह की पूजा के बाद स्थानीय लोग तीन दिनों तक इस जात्रा को भव्य रूप से मनाते हैं। जात्रा के दौरान बनेपा के सभी नेवार समुदाय के घरों में भोज का आयोजन किया जाता है।

परंपरा के अनुसार इस अवसर पर घरों की विशेष सफाई और शुद्धिकरण किया जाता है। खास तौर पर पूर्णिमा से एक दिन पहले काठमांडू के हनुमान ढोका से लाए जाने वाले तलवार के साथ जात्रा में सरकार की ओर से भी पूजा करने की परंपरा रही है। वहीं, बुजुर्ग लोग विभिन्न टोलों में बैठ कर भजन गाते हैं और पूरे शहर की सड़कें तथा गलियां श्रद्धालुओं की भीड़ से भर जाती हैं।

जात्रा शुरू होने के दिन बनेपा के तीनधारा में बिना पहिए वाला एक विशेष खट (रथ) तैयार किया जाता है। इस खट को भेड़ की बलि देने के बाद गाजे-बाजे के साथ युवा कंधों पर उठाकर चण्डेश्वरी मंदिर तक ले जाते हैं। रथ खींचने और आगे बढ़ाने वाले युवाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए बाजार के हर घर की खिड़कियों से लोग उनका हौसला बढ़ाते हैं। घर-घर में तैयार किए गए प्रसाद को खिड़कियों से ही रथ में विराजमान चण्डेश्वरी देवी को अर्पित किया जाता है।

पूर्णिमा के अगले दिन देवी सहित खट की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर उसे पुनः बनेपा के बकुटोल क्षेत्र में लाया जाता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां देवी चण्डेश्वरी ने दैत्यराज चण्डासुर का वध करने के बाद उसे समाधिस्थ किया था। वहां रथ पहुंचने पर भव्य स्वागत, बलि और पूजा-अर्चना की जाती है।

इसके बाद खट को प्राचीन लायकू दरबार तक ले जाया जाता है। वहां से चण्डेश्वरी देवी की मूर्ति को एक छोटे खट में रखकर पुनः बकुटोल लाया जाता है। बाद में मूर्ति को पुनः चण्डेश्वरी मंदिर पहुंचाने के साथ जात्रा सम्पन्न होती है।

शक्ति की देवी मानी जाने वाली चण्डेश्वरी देवी की पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस जात्रा में शामिल होने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

चण्डेश्वरी जात्रा में बनेपा के स्थानीय मानन्धर, भोछिभोया, राजवाहक सहित सभी नेवार समुदायों की प्रत्यक्ष सहभागिता रहने के कारण इस पर्व को विशेष महत्व के साथ मनाया जाता है।

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