राजनीतिक दलों ने नगर निगम व परिषद के चुनावों को बनाया प्रतिष्ठा का सवाल
मंडी, 10 मई । हिमाचल प्रदेश में शहरी व ग्रामीण संसद के प्रतिनिधियों के चुनाव हेतु चल रही प्रक्रिया ने मई महीने की गर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है। आसमानी पारे में राजनीतिक दलों व नेताओं के दखल ने और अधिक इजाफा कर दिया है। रोचक यह है कि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा कांग्रेस ने छोटे स्तर पर होने वाले इस चुनाव को भी बेहद दिलचस्प व प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। जहां तक पूरे प्रदेश की बात है तो चार नगर निगमों मंडी, सोलन, पालमपुर और धर्मशाला में चुनाव हो रहे हैं जहां से कुल 172 उम्मीदवार मैदान में हैं। मंडी में 42 हैं। चुनाव को कितनी गंभीरता के साथ लड़ा जा रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी कांग्रेस सरकार शहरों में आकर बैठ गई है। हर वार्ड में मंत्री व विधायक बैठ गए हैं। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य ने भी मंडी में डेरा डाल रखा है।
दूसरे शहरों में भी संबंधित प्रभारी मंत्री डेरा डाले हुए हैं। वह हर वार्ड में जा रहे हैं। उनके अनुसार अभी यहां पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी चुनाव प्रचार करने आएंगे। उनका पूरे प्रदेश में नगर निगम चुनावों का प्रचार करने का कार्यक्रम है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी चुनाव प्रचार के लिए आने वाले हैं ऐसा बताया जा रहा है। अन्य सभी मंत्री, चेयरमैन व विधायक भी शहरों में आकर डट गए हैं। दूसरी ओर भाजपा ने तो इससे भी आगे आकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी इसमें झौंक रखा है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह का मंडी भ्रमण हो चुका है, कार्यकर्ता सम्मेलन के नाम पर वह चुनावी घुट्टी पिला कर चले गए। दूसरी जगह भी जा रहे हैं। उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल भी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा कर चुनाव जीतने का मंत्र दे गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर का तो मंडी गृह जिला है। वह अन्य जगहों पर भी जा रहे हैं मगर मंडी में तो वह लगभग हर वार्ड में जाकर कार्यालय खोलने के बहाने प्रचार कर चुके हैं। अभी प्रचार के पांच दिन बाकी हैं, 17 मई को मतदान है और 15 मई की शाम को प्रचार खत्म होगा और तब तक पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष दिन रात प्रचार में डटे रहेंगे ऐसा बताया जा रहा है। अन्य नेता व संगठन के पदाधिकारी भी अपने अपने तरीके से शहरों में हर घर तक दस्तक देने लगे हैं।
ग्रामीण संसद के चुनावों के लिए उम्मीदवारों को आंकड़ा 50 हजार से उपर जाने की उम्मीद जहां तक पंचायती राज संस्थानों जिसे ग्रामीण संसद कहा जाता है के लिए प्रदेश की लगभग 3577 पंचायतों में दो दिनों में नामांकन भरने वालों का आंकड़ा 42562 पहुंच गया है। भले ये चुनाव पार्टी चुनाव चिह्नों पर नहीं हो रहे हैं मगर अंदरखाने जिला परिषद के लिए दलों ने ही अपने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। पंचायत समिति व प्रधान के पद भी परोक्ष अपरोक्ष तौर पर राजनीतिक दलों के साथ जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह चुनाव आने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
सोमवार को नामांकन भरने की आखिरी तारीख है और ऐसा माना जा रहा है कि अंतिम दिन बड़ी तादाद में जिला परिषद, पंचायत समिति, प्रधान, उपप्रधान व वार्ड पंच के लिए नामांकन पत्र भरे जाएंगे। इससे यह आंकड़ा यकीनी तौर पर 50 हजार से उपर जाने की उम्मीद है। रोचक यह है कि सरकार ने जहां आशा वर्कर को चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी हैं वहीं सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर एक और कड़ा प्रहार करते हुए यदि ससुर के नाम से कोई अवैध कब्जा होगा तो बहू भी चुनाव नहीं लड़ पाएगी ऐसा प्रावधान भी पहली बार किया गया है। ऐसे में कई चाहवानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। फिलहाल अब तक जो चुनावी गर्मी प्रदेश शहरों तक ही देखी जा रही थी, सोमवार को ग्रामीण हल्कों में उससे कहीं ज्यादा देखने को मिलेगी। यह चुनावी तापमान 31 मई चुनाव पूर्ण होने तक बराबर बनी रहेगी।

