पन्ना कुआं हादसे में बड़ा खुलासा, एक साल पुराने निर्माण को ठेके पर कराने के आरोप
पन्ना, 28 मई । मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा में निर्माणाधीन कुएं में हुए दर्दनाक हादसे के बाद नए खुलासे सामने आ रहे हैं। हादसे में पांच मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। अब मृतकों के परिजनों ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं।
परिजनों का कहना है कि जिस कुएं में हादसा हुआ, वह पिछले वर्ष भी धंस चुका था। उस समय गहराई कम होने से बड़ा हादसा टल गया था। आरोप है कि एक वर्ष बाद उसी कुएं का निर्माण दोबारा शुरू कराया गया और पंचायत द्वारा कथित रूप से इसे ठेके पर दे दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी तक दर्ज नहीं की जा रही थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि ग्राम रोजगार सहायक से कई बार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने को कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य कागजों में पूर्ण दर्शाया गया होगा, जबकि मौके पर ठेके के माध्यम से काम कराया जा रहा था।
मृतकों के परिजनों ने जनपद पंचायत अजयगढ़ के अधिकारियों और तकनीकी अमले पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उपयंत्री आशीष विश्वकर्मा, एसडीओ प्रशांत नायक और सीईओ सतीष नागवंशी ने कभी निर्माण स्थल का निरीक्षण तक नहीं किया, जबकि तकनीकी अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्माण कार्य की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है।
मामले में अजयगढ़ थाना पुलिस ने ग्राम पंचायत बीहरपुरवा की सरपंच सरोज पटेल, उनके पति संतोष पटेल और कथित ठेकेदार रामबाबू पटेल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मृतकों के परिजन एक करोड़ रुपये मुआवजा और सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में शासन को प्रत्येक मृतक के परिजन को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव भेजा गया, जिसके बाद प्रदर्शन और जाम समाप्त हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के तहत करीब 6.5 लाख रुपये से स्वीकृत यह कुआं पिछले वर्ष बारिश के कारण अधूरा रह गया था। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों और तकनीकी सावधानियों की अनदेखी करते हुए मजदूरों को दोबारा गहराई में उतार दिया गया, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हो गया।

