अदालती आदेश के बाद भी पूर्व की सेवा का लाभ नहीं देने पर अवमानना नोटिस
जयपुर, 26 जून । राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भी कर्मचारी के समायोजन से पूर्व की गई सेवा का लाभ नहीं देने पर जयपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा और कोटपूतली पंचायत समिति के विकास अधिकारी महेंद्र पाल को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश पार्वती देवी की अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति रविकांत शर्मा को साल 1983 में कोटपूतली नगर पालिका में नाकेदार पद पर नियुक्त किया गया था। वहीं साल 2001 में उन्हें सरप्लस घोषित कर उनका समायोजन ग्राम सेवक के पद पर कर दिया। याचिका में कहा गया कि साल 2015 में याचिकाकर्ता के पति का निधन हो गया। इस पर विभाग ने याचिकाकर्ता को समस्त परिलाभ दिए, लेकिन पति के सेवाकाल की गणना साल 2001 से की गई। जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर अदालत ने गत दिसंबर माह में याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया था। इस पर याचिकाकर्ता ने विभाग के समक्ष अपना अभ्यावेदन पेश कर पूर्व की सेवा की गणना करते हुए समस्त परिलाभ देने को कहा। इस पर कार्रवाई करते हुए विकास अधिकारी ने याचिकाकर्ता को संपूर्ण लाभ देने का मामला बनाकर जयपुर जिला परिषद में भेज दिया, लेकिन जिला परिषद की ओर से उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

