Himachal Pradesh

शिमला जिला परिषद चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट पहुंची भाजपा, 13 निर्वाचित सदस्यों ने दायर की याचिका

शिमला, 10 अगस्त । शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी का मामला अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। 13 निर्वाचित सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए वैधानिक बैठक बुलाने और चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश देने की मांग की है। याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग, हिमाचल प्रदेश सरकार और उपायुक्त शिमला को प्रतिवादी बनाया गया है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि निर्वाचित सदस्यों को अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।

शिमला जिला परिषद में कुल 25 निर्वाचित सीटें हैं। पंचायत चुनाव 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में हुए थे। मतगणना के बाद 31 मई और 1 जून को परिणाम घोषित किए गए। इसके बाद उपायुक्त शिमला ने 3 जून को सभी निर्वाचित सदस्यों को 6 जून की बैठक के लिए नोटिस जारी किया था। इसमें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 90 और 127 का उल्लेख किया गया था।

जयराम ठाकुर के मुताबिक 6 जून को सभी 25 निर्वाचित सदस्य बैठक में मौजूद थे। जरूरी कोरम पूरा था और सदस्यों को शपथ भी दिलाई गई। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया और बैठक स्थगित कर दी गई। उनका सवाल है कि जब पूरा निर्वाचित सदन मौजूद था और शपथ भी हो चुकी थी तो चुनाव क्यों नहीं कराया गया।

इसके बाद 20 जून को एक और नोटिस जारी कर 27 जून को बैठक बुलाई गई। याचिका के अनुसार इस बैठक में केवल 11 सदस्य मौजूद थे। उपायुक्त बैठक में मौजूद नहीं थे और अतिरिक्त उपायुक्त ने बैठक की अध्यक्षता की। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव फिर नहीं हो सका। इसके बाद 20 जुलाई को 3 अगस्त को चुनाव कराने के लिए नया नोटिस जारी किया गया। इसमें धारा 90 और नियम 86 के तहत चुनाव का उल्लेख था, फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

जयराम ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट का 6 अगस्त का एक फैसला इस मामले में महत्वपूर्ण है। यह फैसला पंचायत समिति इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी से जुड़े मामले में आया था। उनके अनुसार इस फैसले में निर्वाचित स्थानीय निकाय के चुनाव को प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण अनिश्चित समय तक रोकने पर सवाल उठाया गया है।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार चुनाव में अपने पक्ष में संख्या नहीं होने के कारण प्रशासनिक प्रक्रिया को लंबा खींच रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए तत्काल तारीख तय करने की मांग की। उनका कहना है कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को अपना नेतृत्व चुनने का अधिकार मिलना चाहिए और प्रशासन को इस प्रक्रिया में देरी नहीं करनी चाहिए।