Delhi

अरावली पहाड़ियों पर उच्च-स्तरीय कमेटी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 30 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

नई दिल्ली, 07 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने अरावली की पहाड़ियों की परिभाषा और उनके संरक्षण को लेकर गठित उच्च-स्तरीय कमेटी को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने 30 नवंबर तक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कमेटी की मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि कमेटी ने मेरे रिटायरमेंट तक मामले को टालने के लिए समय मांगा है।

दरअसल, उच्च स्तरीय कमेटी ने इस मामले में छह महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। कमेटी ने 28 फरवरी, 2027 तक का अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। कोर्ट ने 30 नवंबर तक का समय देते हुए साफ कहा कि इसके बाद समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कमेटी ने मेरे रिटायरमेंट तक मामले को टालने के लिए अतिरिक्त समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत 9 फरवरी, 2027 को रिटायर होंगे।

कोर्ट ने उच्च-स्तरीय कमेटी से साफ कहा कि अगर जरुरत पड़े, तो दिन-रात काम करके तय समय-सीमा में रिपोर्ट पूरी की जाए। कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत इस मामले से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनने का भी दिया दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर किसी खास मुद्दे पर तुरंत फैसला जरुरी हो तो कमेटी उस पर अलग से अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने तीन जून को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने उच्च-स्तरीय कमेटी से 31 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। उच्च-स्तरीय कमेटी की अध्यक्षता इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्टरी रिसर्च एंड एडुकेशन (आईसीएफआरई) के महानिदेशक कंचन देवी कर रही हैं। कंचन देवी के अलावा इस कमेटी में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व महानिदेशक डॉ सुभाष आशुतोष, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक डॉ राजेंद्र कुमार शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव बृज मोहन सिंह राठौर और दिल्ली यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अशोक भटनागर शामिल हैं।