पत्नी और अबोध की हत्या करने वाले अभियुक्त की फांसी को उम्रकैद में बदला
जयपुर, 06 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा के पांच साल पुराने दोहरे हत्याकांड के अभियुक्त को मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने कहा है कि अभियुक्त को बिना किसी छूट के 75 साल की उम्र होने तक जेल में रखा जाए। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार के डेथ रेफरेंस को खारिज करते हुए अभियुक्त पिंटू डागर की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि घटना पहले से सोची-समझी साजिश नहीं है। अभियुक्त पन्द्रह साल से विवाहित था और उसके दो बेटे थे। घटना घर के भीतर अचानक हुई कहासुनी का नतीजा थी और इस दौरान उसने गुस्से में आकर हत्या कर दी। घटना के समय छह माह का बच्चा गोद में था और उसे भी जानलेवा चोट लग गई। अदालत ने कहा कि अभियुक्त दैनिक मजदूरी करता था और बुजुर्ग माता-पिता के अलावा उसके 14 साल का बेटा भी है। बीते पांच साल से जेल में उसका व्यवहार शांत रहा है और उसमें सुधार की गुंजाइश मौजूद है।
डेथ रेफरेंस में राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित पूनिया ने अदालत को बताया कि एक जून, 2021 को अभियुक्त ने अपनी पत्नी और छह माह के बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। मामले में एडीजे कोर्ट ने गत 23 जनवरी को फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को फांसी की सजा से दंडित किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अभियुक्त ने अपनी बेबस पत्नी और छह माह के बेटे की हत्या की है। इसलिए उसे फांसी की सजा से दंडित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गाय की नियमानुसार अभियुक्त की फांसी की सजा को कंफर्म किया जाए। वहीं अभियुक्त की ओर से एडीजे कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई। दोनों मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है।


