हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई राह बना रहीं हल्द्वानी की प्रीति सैनी
नैनीताल, 02 नवंबर । आत्मनिर्भरता की राह हमेशा बड़े संसाधनों या भारी निवेश से होकर नहीं गुजरती। कई बार घर में मौजूद साधन, हाथों का हुनर और कुछ नया करने का संकल्प ही आजीविका का मजबूत आधार बन जाते हैं। हल्द्वानी के बच्चीनगर की प्रीति सैनी इसका उदाहरण हैं, जो अपनी रचनात्मकता और मेहनत के बल पर घर बैठे फूलों की जगह ऊन से हस्तनिर्मित मालाएं तैयार कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को मजबूती देते हुए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी प्रीति ने अपने हुनर को आमदनी का माध्यम बनाया है। दीपावली जैसे त्योहारों के अवसर पर वह ऊन से रंग-बिरंगी और आकर्षक मालाएं तैयार करती हैं। त्योहारों के दौरान इन हस्तनिर्मित मालाओं की मांग बढ़ने से उन्हें अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
प्रीति की रचनात्मकता का दायरा केवल ऊन से बनी मालाओं तक सीमित नहीं है। वह अपने घर में उगाए गये गेंदे के फूलों का उपयोग करके भी सुंदर मालाएं तैयार करती हैं। नवरात्रि, दीपावली और अन्य धार्मिक एवं मांगलिक अवसरों पर फूलों की मालाओं की मांग रहती है। इस तरह वह घर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपनी मेहनत को रोजगार से जोड़ रही हैं।
प्रीति का यह प्रयास उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो हुनर होने के बावजूद रोजगार की तलाश में हैं। उनका काम बताता है कि स्वरोजगार की शुरुआत छोटे स्तर पर भी की जा सकती है। घर की जिम्मेदारियों के साथ अपने कौशल को समय देकर महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ा सकती हैं और परिवार की आमदनी में सहयोग कर सकती हैं।
स्वयं सहायता समूह महिलाओं को एक साथ जुड़ने, अपने उत्पाद तैयार करने और स्वरोजगार के अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध करा रहे हैं। हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से स्थानीय कौशल को भी पहचान मिलती है। प्रीति सैनी की पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती है कि स्थानीय हुनर और उपलब्ध संसाधनों को रोजगार का आधार बनाया जाए।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना तभी व्यापक रूप ले सकता है, जब प्रदेश की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनें और अपनी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ें। प्रीति सैनी की मेहनत इसी दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है।


