Himachal Pradesh

शिमला : मॉनसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं से 16 मौतें, हर पंचायत में तैयार होगी आपदा से लड़ने वाली टीम

शिमला, 24 जुलाई । मॉनसून के इस सीजन में 1 से 24 जुलाई तक शिमला जिले में प्राकृतिक आपदाओं ने 16 लोगों की जान ले ली है। मॉनसून के इस सीजन में शिमला जिले में प्राकृतिक आपदाओं ने 16 लोगों की जान ले ली है। कई मकानों, गोशालाओं और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, जबकि शुरुआती आकलन में करीब 52.80 लाख रुपये की क्षति दर्ज की गई है। भारी बारिश के बीच सड़कें बंद हुईं, बिजली और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित रहीं। शुक्रवार को शिमला में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने ये जानकारी दी।

हर पंचायत में होंगे पांच प्रशिक्षित लोग

हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता आपदा के समय हर व्यक्ति का जीवन बचाना है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि हर पंचायत में कम से कम पांच लोगों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए। उनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोग मौजूद रहने से राहत और बचाव कार्य बिना देरी शुरू किए जा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को पूरे हिमाचल में लागू करने के बारे में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी चर्चा की जाएगी। राठौर ने यह भी बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एक मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके जरिए आपदा की सूचना और घटना स्थल की सटीक लोकेशन कुछ ही सेकंड में राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक पहुंच जाएगी। ऐप का विकास अंतिम चरण में है और इसे जल्द शुरू किया जाएगा।

बारिश ने बढ़ाई चुनौती, फिर भी ज्यादातर सड़कें और सेवाएं हुईं बहाल

बैठक में बताया गया कि एक जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच जिले में 99 संपर्क सड़कें प्रभावित हुईं, जिनमें से 86 को फिर से खोल दिया गया है। 136 बिजली ट्रांसफार्मरों में से 126 बहाल किए जा चुके हैं, जबकि 62 पेयजल योजनाओं में से 42 दोबारा चालू कर दी गई हैं। बाकी स्थानों पर काम जारी है। राहत और बचाव कार्यों के लिए पुलिस और होमगार्ड को 48 तरह के आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को जनरेटर, सैटेलाइट संचार, वीएचएफ नेटवर्क और अन्य आधुनिक संचार सुविधाओं से लैस किया गया है। सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के साथ भी समन्वय बनाया गया है।

‘आपदा सहनशील शिमला’ पर फोकस, बढ़ती बारिश ने बढ़ाई चिंता

उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य शिमला को “आपदा सहनशील” बनाना है। उन्होंने कहा कि राहत राशि समय पर उपलब्ध कराने और जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच जिले में सामान्य से औसतन 52.8 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2025 में सामान्य से 94 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जो सबसे अधिक रही।

उन्होंने बताया कि जिले की 219 पंचायतों को पंचायत इमरजेंसी रिस्पांस योजना में शामिल किया गया है, 200 सुरक्षित आश्रय स्थल चिन्हित किए गए हैं और अब तक 550 ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। बैठक के दौरान समेज त्रासदी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें राहत और बचाव अभियान को दर्शाया गया। इसे देखने के बाद दीपक राठौर ने जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की।