Himachal Pradesh

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर तीन साहित्यकार व दो युवा प्रतिभाएं सम्मानित, दो पुस्तकों का किया विमोचन

मंडी, 31 जुलाई । भाषा एवं संस्कृति विभाग, शिमला व सुकेत साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद, सुंदरनगर के तत्वावधान में प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। बीडीओ आफिस सभागार में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के तीन वरिष्ठ साहित्यकारों और दो युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दो पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिमाचल कला,संस्कृति भाषा अकादमी की सदस्य रेखा वशिष्ठ बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रही। वहीं पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सुकेत साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद सुंदरनगर के अध्यक्ष डॉक्टर गंगा राम राजी ने बताया कि प्रेमचंद जयंती का आयोजन भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला के तत्वावधान में किया गया।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार डा. सुशील कुमार फुल्ल को नागेश भारद्वाज स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। सुकेत साहित्य एवं संस्कृति परिषद के अध्यक्ष गंगाराम राजी ने उन्हें शाल टोपी के अलावा पांच हजार रूपए का चेक पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया। वहीं पर मशहूर कवि गणेश गनी को उनकी नई किताब ढालपुर में चिनार के लिए सुरेश सेन स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कवि-कथाकार पवन चौहान ने गणेश गनी की किताब की समीक्षा की।

गणेश गनी को पहले सुरेश सेन निशांत स्मृति सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र व पांच हज़ार रुपए की राशि दी गई। इसके अलावा वरिष्ठ कवि आलोचक डा. विजय विशाल को भगवान देव चैतन्य स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा उभरती हुई युवा प्रतिभा आस्था को रेखाचित्र और अंतरिक्ष को डिजिटल फोटोग्राफी के लिए सम्मानित किया गया। दोनों ही युवा प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में अपने हुनर का जाैहर दिखा चुकी हैं। युवा कवि कथाकार अनिल महंत ने सम्मानित विभूतियों का परिचय प्रस्तुत किया। इसके अलावा मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह के प्रथम सत्र में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसमें गंगा राम राजी के उपन्यास जीवट और गणेश गनी के काव्य-संग्रह ढालपुर में चिनार का विमोचन डा. रेखा वशिष्ठ व अन्य मंचासीन साहित्यकारों ने किया। भी किया गया। जीवट उपन्यास पर समीक्षा गणेश गनी ने प्रस्तुत की। रंगकर्मी सीमा शर्मा ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी का नये अंदाज में अभिनय वाचन किया। व

रिष्ठ साहित्यकार डा. सुशील कुमार फुल्ल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां बार-बार पढ़ने के बाद भी नया अनुभव लेकर आती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने कहा है कि लेखकों काे महत्वकांक्षा पालने के बजाय दूसरों के दुखदर्द को स्वर देना चाहिए। डा. फुल्ल ने कहा कि जिस कहानी में अन्याय के प्रति आक्रोश झलके, वही सार्थक और प्रासंगिक है।