Delhi

डेयरी एनालॉग प्रोडक्ट्स की बिक्री पर केंद्र और फूड सेफ्टी कमिश्नर से जवाब तलब

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, एफएसएसएआई, दिल्ली सरकार और फूड सेफ्टी कमिश्नर से जवाब तलब किया है। इस याचिका में राजधानी में पनीर के नाम पर बेचे या परोसे जा रहे डेयरी एनालॉग और नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे की बेंच ने इन सभी संबंधित पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं रिधिमा सिंह और वकील अवलोकितेश्वर पद्मपाणि सिद्धार्थ की ओर से दलील दी गई कि जब कोई ग्राहक रेस्तरां या क्लाउड किचन से ‘पनीर टिक्का’ या ‘कढ़ाई पनीर’ ऑर्डर करता है, तो उसे असली दूध से बना पनीर मिलने की उम्मीद होती है। मौजूदा व्यवस्था में ग्राहकों के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि उन्हें परोसा गया उत्पाद असली पनीर है या वनस्पति तेल और स्टार्च से बना हुआ कुछ और है।

याचिका में गैर-डेयरी या प्लांट-बेस्ड उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय मांग की गई है कि इन्हें ‘पनीर’ बताकर न बेचा जाए। यदि रेस्तरां या फूड बिजनेस इसका इस्तेमाल करते हैं, तो वे मेन्यू या उसके लेबल पर इसका स्पष्ट रूप से खुलासा करें। नवरात्रि और दशहरा के त्योहारी सीजन को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने बाजार में बिक रहे पनीर के नमूनों की तत्काल जांच और निगरानी बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि प्राधिकारी पहले से ही कार्रवाई कर रहे हैं और उन्होंने इस संबंध में आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल, वह कोई अंतरिम आदेश नहीं दे रहा है।

याचिका में कहा गया कि गुजरात, पंजाब, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्य पहले ही नॉन-डेयरी पनीर के खिलाफ सख्त नियामक कदम उठा चुके हैं, इसलिए दिल्ली में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।