स्वाद के लिए मशहूर 75 साल पुरानी दुकान में लगती है गुलाब जामुन खाने वालाें की भीड़
दुकान के वर्तमान संचालक अनुज पोरवाल बताते हैं कि उनके दादा स्व. सालिगराम पोरवाल ने वर्ष 1950 में यह दुकान शुरू की थी। उनके बाद पिता स्व. रामकुमार पोरवाल ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। आज भी मिष्ठान बनाने में वही पारंपरिक तरीका अपनाया जाता है जिससे गुलाब जामुन का स्वाद कभी नहीं बदला। अनुज कहते हैं कि “हम गुलाब जामुन में मावा, केसर, इलायची, जावित्री, जायफल और वनस्पति घी का प्रयोग करते हैं। यही पुरानी रेसिपी आज भी इस मिठाई को खास बनाती है।”
त्योहारों के मौसम में यहां की रौनक देखते ही बनती है। लोग दूर-दराज के गांवों से भी सिर्फ गुलाब जामुन खरीदने आते हैं। कई ग्राहक तो पहले से ऑर्डर बुक करवा देते हैं ताकि आखिरी समय में मिठाई खत्म न हो जाए। उन्हाेंने बताया कि गुलाब जामुन की कीमत 200 रुपये प्रति किलो है।उन्हाेंने कहा कि त्याेहाराें के सीजन में मिष्ठान दुकानाें में अक्सर मिलावटी मिठाईयां बनाने की शिकायतें आती हैं या पकड़ी जाती हैं। इसकाे लेकर
उनका कहना है कि अनजान या नई जगह से मिष्ठान सस्ते या अन्य लुभावने चक्कर में पड़ कर न लें, यह सेहत के लिए हानिकारक है।
भीखेपुर की यह ऐतिहासिक दुकान न सिर्फ मिठाई प्रेमियों के स्वाद को संतुष्ट कर रही है, बल्कि परंपरा और भरोसे की मिठास को भी बरकरार रखे हुए है। बदलते दौर में भी इस दुकान का स्वाद वही पुराना और दिल छू लेने वाला बना हुआ है, जो इसे पूरे जिले की शान बनाता है।

