आरटीआई मामलों के निपटारे में तेजी, लंबित अपीलों में आई उल्लेखनीय गिरावट: सुरेश कश्यप
कश्यप ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 2019-20 में जहां 35,718 द्वितीय अपीलें लंबित थीं, वहीं यह संख्या 2021-22 में घटकर 29,213, 2023-24 में 23,087 और 2024-25 में 22,666 तक आ गई है। उन्होंने इसे सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में आई सुधार और सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि आरटीआई अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। 2014 के बाद पहली बार सीआईसी को अपना स्वतंत्र कार्यालय परिसर मिला, जबकि इससे पहले यह किराए की इमारत में संचालित हो रहा था। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार आयोग को कार्यालय तक नहीं दे सकी, वह आज RTI पर नैतिकता की बातें कर रही है।
सांसद ने बताया कि सीआईसी प्रतिवर्ष औसतन 17,000 द्वितीय अपीलों का निपटारा कर रहा है, जिससे सूचना तक पहुंच में तेजी और पारदर्शिता बढ़ी है।
कश्यप ने यूपीए सरकार और मौजूदा सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि 2007 से 2014 के बीच आरटीआई अनुपालन दर 77% थी, जबकि वर्तमान सरकार के सात वर्षों में यह बढ़कर 94% तक पहुंच गई है। इसी तरह निपटान दर यूपीए शासन में 81.79% (1,32,406 मामले) थी, जो अब बढ़कर 92% (1,60,643 मामले) हो गई है।
यह जानकारी सुरेश कश्यप ने हाल ही में सूचना आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के संदर्भ में दी। इस कार्यक्रम में नोडल अधिकारी, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य सूचना अधिनियम के अनुरूप कार्य करते हुए उत्तर तैयार करने की दक्षता और जवाबदेही को मजबूत करना था।

