Rajasthan

नाबालिग को नियुक्ति देकर बाद में किया बर्खास्त, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को किया रद्द

जयपुर, 20 अप्रैल । राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग को सफाई कर्मचारी के तौर पर नियुक्ति देने के कुछ साल बाद उसे इस आधार पर बर्खास्त करने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने उसे बर्खास्त करने वाले 20 फरवरी, 2023 के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता को इस अवधि का भुगतान दिए बिना अन्य परिलाभों के साथ पुन: सेवा में लिया जाए। जस्टिस अशोक कुमार जैन यह आदेश जितेन्द्र मीणा याचिका पर दिए।

अदालत ने कहा कि नियुक्ति के समय याचिकाकर्ता ने कोई तथ्य नहीं छिपाए थे। यह नियोक्ता की जिम्मेदारी थी कि वह तथ्यों का सत्यापन करता, लेकिन उन्होंने न तो आवेदन पत्र की जांच के समय, चयन प्रक्रिया के दौरान और ना ही नियुक्ति देते समय सत्यापन किया। इसके अलावा सेवा समाप्त करने से पूर्व याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया।

याचिका में अधिवक्ता सीपी शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने साल 2018 में सफाई कर्मचारी के पदों पर भर्ती निकाल न्यूनतम 18 साल की आयु के अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे। याचिकाकर्ता की उम्र उस समय 18 साल से कम थी, लेकिन उसने यह तथ्य नहीं छिपाया और भर्ती में शामिल हो गया। विभाग ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर उसका चयन कर लिया और सितंबर, 2018 में उसे नियुक्ति दे दी। याचिका में कहा गया कि उस समय वह 17 साल 4 माह का था। नियुक्ति के बाद अप्रैल, 2019 और मई, 2020 में उसके प्रकरण को स्थानीय निकाय निदेशक को भेजा गया, लेकिन निदेशक ने उस पर अपना जवाब देने में दो साल का समय लगा दिया। इस दौरान याचिकाकर्ता न्यूनतम आयु सीमा को पार कर गया। इसके बाद 20 फरवरी, 2023 को उसे 22 साल की उम्र में सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके चुनौती देते हुए कहा गया कि उसने कोई तथ्य नहीं छिपाया है तो उसकी बर्खास्तगी नहीं की जा सकती। वहीं विभाग की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने विज्ञापन की शर्त के अनुसार 1 जनवरी, 2019 को न्यूनतम आयु सीमा प्राप्त नहीं की थी, लेकिन लिपिकीय गलती के कारण उसकी नियुक्ति हो गई। ऐसे में याचिकाकर्ता को बर्खास्त करना उचित था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है।