18 मई से सीवर संकट की गिरफ्त में सेक्टर-जे: शिकायतों का अंबार, जिम्मेदारों की खामोशी से फूटा जनाक्रोश
महापौर से मुख्यमंत्री पोर्टल तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान; घरों में घुस रहा सीवर, दुर्गंध और गंदगी से त्रस्त सैकड़ों लोग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-जे में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। मकान संख्या E-111/685 से E-111/703 तक रहने वाले परिवार पिछले कई दिनों से सीवर बैकफ्लो, सड़कों पर बहते गंदे पानी और असहनीय दुर्गंध के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई घरों में सीवर का पानी वापस लौटकर प्रवेश कर रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में बीमारी और संक्रमण का भय बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों और जागृति जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई है। समिति के अध्यक्ष दया शंकर शुक्ला तथा अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा लिखित शिकायतें संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
18 मई को हुई शिकायत, लेकिन राहत का इंतजार जारी
जानकारी के अनुसार, 18 मई 2026 को सीवर संचालन कर रही निजी कंपनी SUEZ के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या C2026053931 जारी करते हुए जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था। शिकायत दर्ज होने का संदेश भी प्राप्त हुआ, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अधिकारियों के आश्वासन और जनता की बेबसी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। हर बार जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन मौके पर कोई स्थायी कार्यवाही नहीं हुई। अब क्षेत्रवासियों में यह धारणा बनती जा रही है कि शिकायतें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और जिम्मेदार एजेंसियां अपनी जवाबदेही से बच रही हैं।
महापौर, विधायक, नगर आयुक्त और मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंची शिकायत
समस्या की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रवासियों ने पार्षद, महापौर, विधायक, नगर आयुक्त सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी मामला उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद समाधान न होना लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
निजीकरण पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीवर व्यवस्था के निजी हाथों में जाने के बाद जवाबदेही का संकट और गहरा हुआ है। लोगों का सवाल है कि यदि शिकायत संख्या जारी होने और लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर समस्या का समाधान नहीं होता, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले में बहता सीवर और जलभराव मच्छरों तथा संक्रामक बीमारियों को बढ़ावा देता है। ऐसे में यह समस्या केवल स्थानीय असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल
आज सेक्टर-जे के नागरिक पूछ रहे हैं कि शिकायतों, ज्ञापनों और जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज गुहारों के बाद भी यदि राहत नहीं मिलती, तो आम नागरिक आखिर किसके दरवाजे पर न्याय की उम्मीद लेकर जाए?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। जब तक सीवर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लोगों का दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा लगातार प्रभावित होती रहेगी।
अब निगाहें प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंपनी और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर समस्या को कितनी संवेदनशीलता और तत्परता से लेते हैं।
1818 मई से सीवर संकट की गिरफ्त में सेक्टर-जे: शिकायतों का अंबार, जिम्मेदारों की खामोशी से फूटा जनाक्रोश
महापौर से मुख्यमंत्री पोर्टल तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान; घरों में घुस रहा सीवर, दुर्गंध और गंदगी से त्रस्त सैकड़ों लोग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-जे में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। मकान संख्या E-111/685 से E-111/703 तक रहने वाले परिवार पिछले कई दिनों से सीवर बैकफ्लो, सड़कों पर बहते गंदे पानी और असहनीय दुर्गंध के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई घरों में सीवर का पानी वापस लौटकर प्रवेश कर रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में बीमारी और संक्रमण का भय बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों और जागृति जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई है। समिति के अध्यक्ष दया शंकर शुक्ला तथा अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा लिखित शिकायतें संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
18 मई को हुई शिकायत, लेकिन राहत का इंतजार जारी
जानकारी के अनुसार, 18 मई 2026 को सीवर संचालन कर रही निजी कंपनी SUEZ के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या C2026053931 जारी करते हुए जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था। शिकायत दर्ज होने का संदेश भी प्राप्त हुआ, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अधिकारियों के आश्वासन और जनता की बेबसी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। हर बार जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन मौके पर कोई स्थायी कार्यवाही नहीं हुई। अब क्षेत्रवासियों में यह धारणा बनती जा रही है कि शिकायतें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और जिम्मेदार एजेंसियां अपनी जवाबदेही से बच रही हैं।
महापौर, विधायक, नगर आयुक्त और मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंची शिकायत
समस्या की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रवासियों ने पार्षद, महापौर, विधायक, नगर आयुक्त सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी मामला उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद समाधान न होना लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
निजीकरण पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीवर व्यवस्था के निजी हाथों में जाने के बाद जवाबदेही का संकट और गहरा हुआ है। लोगों का सवाल है कि यदि शिकायत संख्या जारी होने और लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर समस्या का समाधान नहीं होता, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले में बहता सीवर और जलभराव मच्छरों तथा संक्रामक बीमारियों को बढ़ावा देता है। ऐसे में यह समस्या केवल स्थानीय असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल
आज सेक्टर-जे के नागरिक पूछ रहे हैं कि शिकायतों, ज्ञापनों और जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज गुहारों के बाद भी यदि राहत नहीं मिलती, तो आम नागरिक आखिर किसके दरवाजे पर न्याय की उम्मीद लेकर जाए?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। जब तक सीवर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लोगों का दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा लगातार प्रभावित होती रहेगी।
अब निगाहें प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंपनी और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर समस्या को कितनी संवेदनशीलता और तत्परता से लेते हैं। मई से सीवर संकट की गिरफ्त में सेक्टर-जे: शिकायतों का अंबार, जिम्मेदारों की खामोशी से फूटा जनाक्रोश
महापौर से मुख्यमंत्री पोर्टल तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान; घरों में घुस रहा सीवर, दुर्गंध और गंदगी से त्रस्त सैकड़ों लोग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-जे में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। मकान संख्या E-111/685 से E-111/703 तक रहने वाले परिवार पिछले कई दिनों से सीवर बैकफ्लो, सड़कों पर बहते गंदे पानी और असहनीय दुर्गंध के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई घरों में सीवर का पानी वापस लौटकर प्रवेश कर रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में बीमारी और संक्रमण का भय बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों और जागृति जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई है। समिति के अध्यक्ष दया शंकर शुक्ला तथा अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा लिखित शिकायतें संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
18 मई को हुई शिकायत, लेकिन राहत का इंतजार जारी
जानकारी के अनुसार, 18 मई 2026 को सीवर संचालन कर रही निजी कंपनी SUEZ के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या C2026053931 जारी करते हुए जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था। शिकायत दर्ज होने का संदेश भी प्राप्त हुआ, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अधिकारियों के आश्वासन और जनता की बेबसी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। हर बार जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन मौके पर कोई स्थायी कार्यवाही नहीं हुई। अब क्षेत्रवासियों में यह धारणा बनती जा रही है कि शिकायतें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और जिम्मेदार एजेंसियां अपनी जवाबदेही से बच रही हैं।
महापौर, विधायक, नगर आयुक्त और मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंची शिकायत
समस्या की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रवासियों ने पार्षद, महापौर, विधायक, नगर आयुक्त सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी मामला उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद समाधान न होना लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
निजीकरण पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीवर व्यवस्था के निजी हाथों में जाने के बाद जवाबदेही का संकट और गहरा हुआ है। लोगों का सवाल है कि यदि शिकायत संख्या जारी होने और लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर समस्या का समाधान नहीं होता, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले में बहता सीवर और जलभराव मच्छरों तथा संक्रामक बीमारियों को बढ़ावा देता है। ऐसे में यह समस्या केवल स्थानीय असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल
आज सेक्टर-जे के नागरिक पूछ रहे हैं कि शिकायतों, ज्ञापनों और जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज गुहारों के बाद भी यदि राहत नहीं मिलती, तो आम नागरिक आखिर किसके दरवाजे पर न्याय की उम्मीद लेकर जाए?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। जब तक सीवर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लोगों का दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा लगातार प्रभावित होती रहेगी।
अब निगाहें प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंपनी और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर समस्या को कितनी संवेदनशीलता और तत्परता से लेते हैं।

