मनरेगा खत्म कर वीबी जी राम जी लागू करना गरीबों के हकों पर हमला: आफ़ताब
नूंह, 02 जुलाई । हरियाणा कांग्रेस ने मनरेगा योजना को खत्म कर उसके स्थान पर लागू की गई वीबी जी राम जी योजना को गरीबों के अधिकारों पर बड़ा हमला बताया है। नूंह से विधायक चौधरी आफताब अहमद ने गुरुवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को राजनैतिक द्वेष की दुर्भावना के तहत इस जनहितैषी योजना को समाप्त किया है। जिसका असर ग़रीब लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने मांग की है कि वीबी जी राम जी को तुरंत निरस्त कर पुरानी मनरेगा योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन की जाए। साथ ही, 15 दिनों में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिले तथा फंड आवंटन के नॉर्मेटिव मॉडल को हटाया जाए।
विधायक आफताब अहमद ने नई योजना की कई गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि मनरेगा अधिकार और मांग आधारित कानून था। इसके तहत गरीब, महिलाएं, एससी, एसटी और ओबीसी समेत वंचित वर्गों के लोग जब काम मांगते थे, तो सरकार को रोजगार देना ही पड़ता था, अन्यथा बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था। इसके विपरीत, नई योजना पूरी तरह सप्लाई-आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार पहले से मजदूरी बजट एवं फंड आवंटित करेगी और उसी सीमा के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरी के लिए अपना हिस्सा 100 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया है, जिससे अब राज्यों को 40 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। इसके अलावा, तय सीमा से अधिक रोजगार देने पर उसका 100 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च राज्यों को उठाना होगा।
विधायक आफ़ताब अहमद ने कहा कि नई योजना के तहत 125 दिन रोजगार देने के मोदी सरकार के दावे की पोल खोलते हुए उदाहरण दिया कि हरियाणा में काम मांग रहे पंजीकृत मजदूरों को औसतन सिर्फ 13.78 व्यक्ति-दिवस का ही रोजगार उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लिए शुरुआती आवंटन 984 करोड़ रुपये है, जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सा यानी 393 करोड़ रुपये राज्य को देना होगा। इसे 125 दिन तक बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार को कम से कम 5,786 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।

