युवराज मनचंदा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और गुरुग्राम प्रशासन से मांगा हलफनामा
नई दिल्ली, 22 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के लाजपत नगर से लापता युवराज सिंह मनचंदा का बिना शिनाख्त अंतिम संस्कार करने के मामले में मंगलवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर और गुरुग्राम प्रशासन को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हलफनामे में यह बताना होगा कि युवराज सिंह मनचंदा की पहचान न हो पाने के बावजूद उनका अंतिम संस्कार क्यों किया गया। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
युवराज सिंह मनचंदा 06 सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर से लापता हुए थे। वे अपनी बहन के साथ शादी की खरीदारी करने गए थे और गुरुग्राम में एक मीटिंग की बात कहकर निकले लेकिन घर नहीं लौटे। मनचंदा के परिजनों ने इस बारे में लाजपत नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुक्ता गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस बात की सूचना थी कि दिल्ली से एक व्यक्ति गुम हुआ है। तीन दिन बाद पता चला कि एक शव गुरुग्राम में बरामद हुआ है लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो पाई, जिसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और गुरुग्राम प्रशासन से इस पूरे मामले में व्यक्तिगत तौर पर विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अज्ञात शव मिलने पर इसकी जानकारी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं की गई। मुक्ता गुप्ता, उच्चतम न्यायालय द्वारा मानव तस्करी व लावारिस शवों के निपटारे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए गठित विशेष कमेटी की चेयरपर्सन हैं।

