शिव मंदिर पौड़ी वाला में श्रावण के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं का तांता
नाहन, 03 अगस्त । सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन से लगभग सात किलोमीटर दूर त्रेता युग में स्थापित स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी के रूप में विख्यात शिव मंदिर पौड़ी वाला में श्रावण के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालु आज तड़के से ही यहां कतारबद्ध होकर इस दिव्य शिवलिंग पर जलाभिषेक कर स्वयं को धन्य समझते हैं। मंदिर में शिव परिवार, परिसर में नंदी महाराज, बजरंगी, शीतला माता तथा बांके बिहारी मंदिर स्थित है। मंदिर परिसर में ही अति प्राचीन धूना तथा यहां रहे महात्माओं की समाधियां स्थित हैं।
इतिहासकार इस मंदिर का सम्बन्ध लंकापति रावण से जोड़ते हैं। उनके अनुसार लंकापति रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या की। आशुतोष भगवान शिव ने उन्हें अमरता प्राप्त करने के लिए एक दिन में पांच शिवलिंग स्थापित करने को कहा जिनके पूर्ण होने पर उसे अमरता प्राप्त होने का वरदान दिया। लंकापति रावण ने पहला शिवलिंग हरकी पौड़ी,दूसरा इस स्थान पर, तीसरा चूडेश्वर महादेव, चौथा किन्नर कैलाश में स्थापित किया। बताया जाता है कि रावण की अमरता रोकने के लिए भगवान नारायण ने निंद्रा भगवती को रावण में प्रवेश करने का निर्देश दिया तथा रावण को नींद आ गई।जब रावण नींद से जागे तो अगला दिन हो गया था तथा वरदान निष्प्रभावी हो गया था। अतः रावण अमर न हो सका।
वर्तमान में यह मंदिर केवल मंदिर न होकर एक तीर्थ बन चुका है। यहां हर शिवरात्रि पर्व, प्रत्येक सोमवार तथा श्रावण तथा माघ मास के सोमवारों को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त शिवलिंग पर षोडशोपचार पूजन तथा रूद्राभिषेक कर स्वयं को धन्य समझते हैं।श्रद्धालुओं द्वारा यहां विशेष पर्वों पर भण्डारों का आयोजन किया जाता है।
बताया जाता है कि धारटीधार के प्रसिद्ध शिवालय दग्योन के संस्थापक महात्मा प्यारा नंद को शिव प्राप्ति का आदेश इसी स्थान से मिला था। वह हरियाणा के अम्बाला के नज़दीक जंडली से शिव साधना प्राप्त करने के लिए इसी स्थान को चुना था।

