Rajasthan

अलवर में संघर्ष: पत्थरबाजी और फायरिंग, 10 घायल, नीलगाय विवाद में बढ़ा तनाव!

अलवर के फाहरी गांव में नील गाय के खेत में घुसने को लेकर दो समूहों के बीच विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया। रविवार शाम लगभग 4:30 बजे यह घटना हुई, जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके और लाठियां चलाईं। बताते चलें कि एक पक्ष ने फायरिंग भी की, जिससे 10 लोग घायल हुए, जिनमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। हेड कॉन्स्टेबल तेजराम ने बताया कि इस घटना की जानकारी पुलिस को शाम 5:15 बजे मिली थी। इसके बाद पुलिस ने फाहरी गांव के लोगों से घटना की जानकारी जुटाना शुरू किया।

इस विवाद का मुख्य कारण साहबदीन और जुबेर के बीच चल रहा विवाद बताया जा रहा है। गाँव के निवासियों के अनुसार, जुबेर पक्ष का कहना है कि साहबदीन ने अपनी फसल को बचाने के लिए नील गायों को उनके खेत में भगा दिया। इस बात को लेकर रविवार सुबह 8 बजे, साहबदीन जब खेत की ओर जा रहे थे तो उन्हें जुबेर, जाहुल, तारीफ और फकरु ने मारपीट का सामना करना पड़ा। साहबदीन ने इस हमले को गंभीरता से लिया और उन्होंने बताया कि जब वे मस्जिद के पास आए, उस समय जुबेर और उसके भाई उन्हें घेर लिया।

दूसरी ओर, शाम को इसी विवाद को लेकर फिर से झगड़ा हो गया, और इस बार जुबेर पक्ष ने लाठियों के साथ हमला किया। साहबदीन ने बचाव किया, लेकिन इस दौरान जाहूल, फकरु और इरशाद ने फायरिंग कर दी। इस हिंसक झड़प में साहबदीन, उस्मानी, फिरोज, सैफुल्ला, मुनासिफ, साहिर, अख्तरी, परमिना और फरजान सहित कई लोगों को छर्रे लगे। घायलों को पहले गोविंदगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया फिर गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अलवर रेफर कर दिया गया।

इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। स्थानीय पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और झगड़े के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। अलवर में इस तरह की हिंसा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है, और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि आगे कोई और अप्रिय घटना न हो सके।

गांव के निवासियों में भय का माहौल बना हुआ है, और इस तरह की घटनाएं न केवल स्थानीय निवासियों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की शांति को भी खतरे में डाल रही हैं। पुलिस प्रशासन ने आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षात्मक कदम उठाने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे स्थानीय विवाद कभी-कभी हिंसक रूप धारण कर लेते हैं, जिससे न केवल संबंधित पक्षों को, बल्कि समग्र समुदाय को भी दुख उठाना पड़ता है।